विद्यापीठ अनुदान आयोग – University Grants Commission

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क्या है भारत का विद्यापीठ अनुदान आयोग?

हेलो दोस्तों, हम हमेशा सुनते है विद्यापीठ अनुदान आयोग के बारे में। पर कितना जानते है हम हमारे विद्यापीठ अनुदान आयोग को?

जैसा कि हम सब जानते हैं विद्यापीठ हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग होता है। हमारे उच्च शिक्षण का सारा कार्यभार विद्यापीठ द्वारा चलाया जाता है भारत में स्थित अनेक विद्यार्थियों में यह कार्य चलता है।

विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करना उसकी गुणवत्ता निर्धारित करना और उसकी गुणवत्ता गुणवत्ता सुधारना इसका सारा कार्य विद्यापीठ द्वारा चलाया जाता है।

हर एक राज्य में अनेक विद्यापीठ होते हैं। यह विद्यापीठ विभागों द्वारा विभाजित किए जाते हैं। हर एक विभाग में तीन से चार जिले आते हैं। और उन चार जिलों या तीन जिलों का एक ही विद्यापीठ होता है।

उस विद्यापीठ के नियंत्रण में उस जिलों के कई स्कूल कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्था आते हैं।उन सब पर नियंत्रण रखना यह विद्यापीठ की जिम्मेदारी होती है।

उन विद्यापीठ मैं गुरु प्राचार्य और शिक्षक उपलब्ध करा देना यह विद्यापीठ की जिम्मेदारी होती है। विद्यापीठ में परीक्षा परीक्षा के अनुसार हम चंद विद्या खेल और अन्य कई शिक्षण से ने गणित विषयों पर ध्यान दिया जाता है। फिर तो द्वारा अंतिम परीक्षा ली जाती है और उसका रिजल्ट भी विद्यापीठ घोषित करता है।

स्कूल कॉलेजों की गुणवत्ता कैसे बढ़ाई जाए उन पर सारा नियंत्रण विद्यापीठ का होता है। विद्यापीठ में दिए गए निर्देशों के अनुसार ही स्कूल कॉलेज चलाए जाते हैं। स्कूल कॉलेज का सर्वोत्तम नियंत्रण विद्यापीठ के पास होता है।

विद्यापीठ में होने वाले निर्णय विषय और सूचना का पालन करना स्कूल और कॉलेजों की जिम्मेदारी होती है। उसी प्रकार स्कूल कॉलेजों की गुणवत्ता प्रतिष्ठा कैसे सुधारे जाए इसके आयोग बनाया गया है।

विद्यापीठ अनुदान आयोग की शुरुआत कब और कैसे हुई?

भारत में उच्च शिक्षा की शुरुआत 1830 में माउंट स्टूअर्ट एलफिंस्टन इनके मिनट से शुरू होती है। जिनमें उन्होंने अंग्रेजी और यूरोपियन विज्ञान पढ़ाने वाली स्कूल की स्थापना करने पर जोर दिया। आगे 1835 में लॉर्ड मेकॉल उन्होंने देश के लोगों को अंग्रेजी सीखने के लिए प्रेरित किया ।सन 1944 में सबसे पहले देश में शिक्षण व्यवस्था स्थापन करने का प्रयत्न किया गया ।और सूचना पत्र जाहिर किया सूचना पत्र को सार्जेंट रिपोर्ट भी कहते हैं उस रिपोर्ट के अनुसार अलीगढ़ बनारस और दिल्ली यह तीन केंद्रीय विद्यापीठ स्थापन किए गए।

आजादी मिलने के बाद सन 1948 डॉ एस राधाकृष्णन इन के नेतृत्व में विद्यापीठ शिक्षण आयोग की स्थापना की गई। उसके अनुसार तत्कालीन शिक्षा मंत्री श्री मौलाना अबुल कलाम आजाद इन्होंने 28 दिसंबर 1953 में विद्यापीठ अनुदान आयोग की स्थापना की गई मात्र एक वैज्ञानिक संस्था की औपचारिकता के रूप में विद्या पीठ संस्थान की स्थापना नवंबर 1956 में संसद के कायदों द्वारा की गई और उसका घोष वाक्य बनाया गया “ज्ञान विज्ञान विमुक्तए”।

मुख्यालय और प्रादेशिक कार्यालयों की जानकारी 

आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में है मात्र अपने कार्यों के फैलाव के लिए नीचे प्रदूषित केंद्र स्थापित किए वह कुछ इस प्रकार है

    • पुणे
    • हैदराबाद
    • कोलकाता
    • भोपाल
    • गुवाहाटी
    • बेंगलुरु

विद्यापीठ अनुदान आयोग देश की इकलौती अनुदान देने वाली संस्था है जिनकी दो जिम्मेदारियां हैं।

  1. विद्यापीठ को निधि या अनुदान मुहैया करा देना और आयोग से अलग-अलग प्रकार की योजनाओं के माध्यम से विद्यापीठ को अनुदान उपलब्ध करा देना

    अ. आयोग की तरफ से केंद्रीय राज्य और अभिमत विद्यापीठ को सामान्य विकास अनुदान शिक्षण के प्रवेश बढ़ाना असामान्य सुनिश्चित करना योगदान करना गुणवत्ता में सुधार प्रभावी प्रशासन तैयार करना विद्यार्थियों की सुविधा बढ़ाना इस प्रकार की विकास के कामों के लिए जाती है

    ब. वैसे ही कुछ और चुने हुए विद्यापीठ को देखभाल अनुदान शिक्षक और शिक्षकों के अलावा कर्मचारियों का पगार प्रयोगशाला लाइब्रेरी इमारत की देखभाल टैक्सेस टेलीफोन इलेक्ट्रिक बिल भरना इनके खर्चों के लिए दिया जाता है

  2. उच्च शिक्षण संस्था में शैक्षणिक गुणवत्ता और समन्वय निर्धार करके उन पर ध्यान देना उसके शासनादेश में इन चीजों का समावेश होता है

अ. विद्यापीठ शिक्षण को प्रोत्साहन और नियमित करने

ब. विद्यापीठ में अध्ययन परीक्षा और संशोधन इन की मानक गुणवत्ता निश्चित करने और कायम रखने

क. पढ़ाई की कम से कम गुणवत्ता के बारे में नियम तैयार करने

ड. कॉलेज पर विद्यापीठ शिक्षण क्षेत्र में विकास पर ध्यान रखना विद्यापीठ और कॉलेज को अनुदान देना

ई. केंद्र और राज्य सरकार के बीच उच्च शिक्षण संस्था के बीच का महत्वपूर्ण रास्ता बनाना

फ. केंद्र और राज्य सरकारों को विद्यापीठ शिक्षण सुधारने की आवश्यक उपाय योजना के बारे में सलाह देना

आंतर विद्यापीठ केंद्र (इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर्स)

सन 1984 से आयोग विद्यापीठओ को संशोधन पर विविध सेवाओं और कार्यक्रमों के लिए सामाजिक सेवा उपलब्ध करके दे रहा है ।इसका कारण विधान निर्माण करके वैदिक विद्यापीठ को उनकी क्षमताओं की आगे ले जाना है

मुक्त विद्यापीठ (ओपन यूनिवर्सिटी)

देश की बढ़ती लोकसंख्या उच्च शिक्षा देने में सबसे बड़ी अड़चन है। भारत में उच्च शिक्षा व्यवस्था का बड़ा विकास होने के बावजूद विकसित देशों की बराबरी से कम है भारत के उच्च शिक्षण व्यवस्था बड़ी होने के बावजूद सबको समा लेने में सक्षम नहीं है फंक्शन का अभाव वित्तीय संसाधनों की कमी इनकी वजह से शिक्षण का विस्तार मर्यादित रहा इन पर उपाय करने के लिए भारत सरकार ने दूरस्थ शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए अलग अलग उदेश बनाए।

    • नियमित नियमित शिक्षा प्राप्त ना करने वाले विद्यार्थियों के लिए बहिस्थ और दूरस्थ शिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराना
    • ऐसी सुविधा शैक्षणिक तांत्रिक और व्यवसाय विषयों के बारे में उपलब्ध कराना
    • शिक्षण की लचिली विविधता पूर्ण और खुली व्यवस्था उपलब्ध कराना
    • सभी उम्र के लोगों के लिए विशेषता नौकरी करने वाले व्यक्ति आर्थिक दृष्टि से दुर्बल अपंग और दुर्गम जगहों के व्यक्तियों के लिए उच्च शिक्षण में व्यापक प्रवेश विकसित कराना
    • डिप्लोमा और प्रमाण पत्र स्तरीय कोर्सेज उपलब्ध कराना
    • शिक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना जिससे वह नए क्षेत्रों में ज्ञान प्राप्त कर सके

भारतीय मुक्त विद्यापीठ ओपन यूनिवर्सिटी की सूचि 

विद्यापीठ अनुदान आयोग
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भारत में एक राष्ट्रीय स्तरीय और 13 राज्य स्तरीय मुक्त विद्यापीठ उनके स्थापना के अनुसार वो कुछ इस प्रकार है

    • डॉ बी आर अंबेडकर मुक्त विद्यापीठ हैदराबाद सन 1982
    • इंदिरा गांधी मुक्त विद्यापीठ नई दिल्ली 1985
    • नालंदा मुक्त विद्यापीठ पटना बिहार 1987
    • वर्धमान महावीर मुक्त विद्यापीठ कोटा राजस्थान 1987
    • यशवंतराव चौहान महाराष्ट्र मुक्त विद्यापीठ नासिक 1989
    • मध्य प्रदेश भोज मुक्त विद्यापीठ भोपाल 1991
    • डॉ बाबासाहेब आंबेडकर मुक्त विद्यापीठ अहमदाबाद 1994
    • कर्नाटक राज्य मुक्त विद्यापीठ मैसूर 1996
    • नेताजी सुभाष मुक्त विद्यापीठ कोलकाता 1997
    • यूपी राजर्षि टंडन मुक्त विद्यापीठ अलाहाबाद 1999
    • तमिलनाडु मुक्त विद्यापीठ चेन्नई 2002
    • पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विद्यापीठ बिलासपुर छत्तीसगढ़ 2005
    • उत्तराखंड मुक्त विद्यापीठ हल्दवानी नैनीताल 2005
    • कृष्णकांत हांडीक राज्य मुक्त विद्यापीठ गुवाहाटी आसाम 2006

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