राष्ट्रीय कृषि विकास योजना – Remunerative Approach for Agriculture and Allied sector Rejuvenation

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RASHTRIYA KRISHI VIKAS YOJANA
RASHTRIYA KRISHI VIKAS YOJANA

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना क्या है?

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना कृषि और उससे निगडीत विभागों के लिए बहुत ही उपर्युक्त योजना मानी जाती है।

इस योजना के अंतर्गत कृषि और उससे निगडी सभी विभागों का खास ध्यान रखा जाता है। और इसमें इन का विकास करने के लिए विशेष रूप से निधि केंद्र सरकार द्वारा प्राप्त करके दी जाती है।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना
Remunerative Approach for Agriculture and Allied sector Rejuvenation

इस योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि विकास है कृषि विकास के साथ-साथ यह योजना पशुपालन और अन्य पर्यावरण नैसर्गिक स्रोत इन पर भी खास ध्यान देती है। इस योजना के अंतर्गत कृषि का विकास किस प्रकार बढ़ाएं और उसके लिए सरकार और क्या-क्या सहायता किसान भाइयों को दे सकती है इसका ध्यान रखा जाता है। और इसका सारा रिकॉर्ड रखा जाता है इस योजना का सारा निधि केंद्र सरकार द्वारा पंचायत समिति या जिला समिति में आता है।

कृषि से निगडी सारे विभागों और ग्रामीण विभागों में मिलने वाले रोजगार यानी पशु पालन कुकुट पालन मासेमारी इस पर भी इस योजना का खास ध्यान होता है इस वजह से यह योजना बहुत सफल मानी जाती है।

इस योजना की शुरुआत कब हुई?

योजना की शुरुआत ११ वी पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत हुई थी। ११ वी पंचवार्षिक योजना २००७ से २०१२ तक की इस योजना का कालखंड भी ऐसा था उसके बाद १२ वी पंचवार्षिक योजना में भी इस योजना को शामिल किया गया था १२ वीं पंचवार्षिक योजना २०१२ से २०१७ तक थी।

२००७ से यह योजना पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाती है यानी कि पूरा खर्चा केंद्र सरकार द्वारा होता है। इसमें राज्य का कोई निधि नहीं होता पूरा निधि केंद्र सरकार द्वारा प्राप्त होता है।

क्या है उद्देश्य राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के?

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि विकास में ४ टक्के विकास प्राप्त करना था। और इसमें कृषि और कृषि से नहीं गणित उत्पादन में अधिक मात्रा में उत्पादन ज्यादा करने का उद्देश्य था इस उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई थी।

कृषि विभागों में और उससे निगड़ी नियोजन बनाना कृषि और पर्यावरण नैसर्गिक स्रोत के प्रश्न तंत्र अधिनियम इन सब का विचार करके कृषि और कृषि विभागों के लिए नियोजन बनाना और पशुधन कुकुट पालन मासेमारी इन जैसे विभागों का समावेश इस योजना में किया गया था यानी कि कृषि से सारे विभागों का इसमें विचार किया गया था।

केंद्र से मिलने वाले निधि राज्य सरकार को प्राप्त होती है और राज्य सरकार इसका किस प्रकार विभाग करता है यह भी केंद्र सरकार निर्धारित करती हैं केंद्र सरकार ने निर्धारित किए गए खर्चे पर ही राज्य सरकार खर्चा कर सकती हैं राज्य सरकार अपनी मर्जी से इस पर खर्चा नहीं कर सकती। राज्य सरकार उत्पादन के लिए ३५ ℅, खर्चा कर सकती है।

और इसके नियोजन के लिए और ३५ ℅ तक का खर्चा कर सकती हैं। ऐसी योजनाओं के लिए २० ℅ का और खर्चा कर सकती है और यदि कुछ बच जाए तो १० ℅ का और किसी अन्य विभागों के लिए खर्चा कर सकती है।

जैसा कि हम सब जानते हैं यह योजना अगले पंचवर्षीय योजना में शुरू की गई थी उस साल यानी कि २००७ में इस योजना को २५००० करोड का निधि उपलब्ध करके दिया गया था। केंद्र सरकार ने राज्य कृषि को २२४०८ करोड़ रुपए दिए गए थे उसमें से २२३२५ करोड़ खर्चा हुआ था।

१२ वीं पंचवर्षीय योजना में ३१५०० उपलब्ध कर दिए गए थे उसमें से २७०२६ खर्चा हुआ था यानी कि केंद्र सरकार राज्य सरकार को बड़ी मात्रा में निधि उपलब्ध करके देती थी और उसमें से कुछ करोड रुपए बस जाते थे यह बचे हुए पैसे वह दूसरे अन्य योजनाओं में यानी कि कृषि से निगडी योजनाओं में इस्तेमाल कर सकते थे अभी तक यह योजना का कार्य अनुरोध है।

इसके अंतर्गत किए गए अन्य कई कार्य

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना
RASHTRIYA KRISHI VIKAS YOJANA

अंतर्गत पूर्व भारत में हरित क्रांति करने का विचार किया गया था इसमें से आसान पश्चिम बंगाल उड़ीसा बिहार झारखंड उत्तर प्रदेश पूर्व भाग और छत्तीसगढ़ आते हैं इन सारे राज्यों में चावल उत्पादन बढ़ाने के लिए बहुत ही योजना तैयार की गई थी और उनका लक्ष्य चावल के उत्पादन में बहुत मात्रा में बढ़ाना था।

धन्य जैसे कि ज्वारी मक्का बाजरा गेहूं इन जैसे कडधान्य का भी उत्पादन बढ़ाने का इस योजना में एक भाग था पर्जन्य श्री प्रदेशों में ६०००० ग्रामीण विभागों के किसानों को प्रोत्साहित कर कर कर देना उत्पादन में चल ना देना यह इस योजना का लक्ष्य था।

६०००० हेक्टर में पाम तेल की खेती करना और उसमें से उत्पादन निकालना यह इस योजना का भी एक महत्तवपूर्ण भागता इसलिए जिस विभागों में पाम तेल का उत्पादन किया जाता है उसमें उस किसानों को अधिक मात्रा में प्रोत्साहन तंत्रज्ञान और योजनाओं के बारे में बताया जाता है।  शहरों में सब्जी मंडी और अन्य कई प्रकार के फल बहुत मात्रा में आवश्यकता होती है और शहरों में खेती ना होने के कारण यह उपलब्ध करा देना सरकार का और व्यापारियों का काम है और व्यापारी और सरकार तभी यह सब उपलब्ध करके दे सकते हैं जब शहर के आसपास होने वाली खेती में सब्जी मंडी की उपज हो सके।

इस लिए शहरों के आसपास रहने वाले किसानों को सब्जी की खेती करने के बारे में प्रोत्साहन योजना और चलना देने का काम इस योजना में रहता था इसकी वजह से योजना के अंतर्गत रहने वाले कर्मचारी आसपास के शहरों में जाते किसानों को इस योजना के बारे में बताते थे और उन्हें इस से क्या-क्या लाभ मिल सकता है और उत्पादन कैसे बढ़ सकता है और कौन से तंत्र ज्ञान और विकसित करके उत्पादन ज्यादा बढ़ाया जा सकता है। इसके बारे में उन्हें प्रेरित करते थे और जानकारी देते हैं।

किसान हमेशा से खेती करता है लेकिन कभी-कभी बारिश ना होने के कारण और वातावरण अच्छा नहीं होने के कारण और अन्य कई कारणों से किसान का बहुत बड़ा नुकसान होता है।

तब किसान का उधर निर्वाह करने के लिए उसे पशु पालन करना पड़ता है। पशुपालन यह एक बहुत ही अच्छा व्यापार भी साबित हो सकता है इसके बारे में जागृति कराने की किसान भाइयों में जरूरत थी जैसे कि पशुधन कुकुटपालन मासेमारी ज्यादातर ग्रामीण भागों में विकसित हो सकता है।

लेकिन मुख्य काम खेती होने के कारण यह विभागों में ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता लेकिन इस योजना के बाद लोग यानी किसान पशुधन के बारे में अभी ध्यान देने लगे हैं क्योंकि पशुधन में गाय भैंस बकरी यह दूध देते हैं। और इनका दूध शहरों में और गांव में भी बहुत ही उपयुक्त होता है और आसानी से उपलब्ध होने के कारण उनको इसके लिए अच्छा सा दाम भी मिल जाता है। हमें पशुधन के बारे में जागृति की जाती है और उन्हें प्रोत्साहन दिया जाता है योजना खास किसानों के लिए बनाई गई है।

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