राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्था – National AIDS Control Organisation

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National AIDS Control Organisation
National AIDS Control Organisation

वर्तमान समय में हमारे देश में बढ़ते हुए एड्स को रोकने के लिए भारत सरकारने १९९२ में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्था की शुरवात की है।

एड्स के बारे में कुछ जरुरी बातें

यह बीमारी एचआईवी ह्यूमन ह्यूमन वायरस एसआरएनए द्वारा होता है। यह विषाणु संसर्ग होने के कारण शरीर की प्रतिकारक क्षमता कम करता है। और शरीर इस संदेशा दू बीमारी ने पड़ जाता है। स्पष्ट रूप से स्पष्ट रूप से यानी कि एचआईवी लागू होने के बाद संसद आखरी भाग होता है।

Lymphadenopathy
Lymphadenopathy

एड्स जवाणु का जब पता चला था तब इस वायरस का नाम Lymphadenopathy रखा गया था परंतु 1986 में राष्ट्रीय इकोनामी समिति ने एचआईवी नाम से इसे संबोधित किया। यह बीमारी संसार का जन्म है।

यह आगे दिए गए कारणों के द्वारा हो सकती है:-

    • एचआईवी वायरस रक्त वीर्य इन जैसे शारीरिक सराव में पाई जाती है। परंतु शरीर के बाहर खुला वातावरण में इस विषाणु का ज्यादा टिकाऊ लगना मुश्किल होता है। एचआईवी का प्रसार होने के लिए शारीरिक शराव की आवश्यकता होती है।
    • एचआईवी संक्रमित व्यक्ति निरोगी व्यक्ति से असुरक्षित लैंगिक संबंध रखने के कारण हो सकता है। श्री पुरुष नैसर्गिक यौन संबंध श्री पुरुष और पुरुष पुरुष और श्री श्री समलिंगी यौन संबंध में भी हो सकता है।
    • एचआईवी संक्रमण व्यक्ति इस्तेमाल की गई सीरीज अनुसुइया रखता मिश्रित पानी विशेषता वेसन करने में अधिक होता है।
    • गर्भवती माता से उसके अजन्मे संतान को भी एचआईवी हो सकता है।

क्या है राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्था?

इस बीमारी को रोकने के लिए भारत सरकार ने एक योजना बनाई गई थी। 1992 में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्था यह स्वतंत्र संस्था स्थापन की गई थी। एनएसयू ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्था शुरू किया गया था। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्था हंड्रेड परसेंट केंद्र पुरस्कृत है।

महाराष्ट्र शासन ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्था का दूसरा भाग शुरू 1998 में। महाराष्ट्र राज्य एड्स नियंत्रण संस्था स्थापन करने के बाद शुरू की गई थी राष्ट्रीय कुटुंब आरोग्य कहानी 3 के अनुसार भारत में इसरो का प्रसाद स्थिरीकरण दिखा गया महाराष्ट्र में एड्स बीमारी प्रसार प्रमाण कम हो रही है। राष्ट्रीय कुटुंब आरोग्य कहानी 3 महाराष्ट्र यह बीमारी का प्रसाद 0.62% ना है।

एड्स के प्रति जनजागृति करना और विशेष गड्ढों में स्थित लोगों को इसके बारे में जानकारी देना और उनकी जांच करना यह राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्था का प्रमुख लक्ष्य है। रेड रिबन यह हिट्स विषयक जागृति का अंतरराष्ट्रीय चिन्ह है। एड्स पीड़ित लोगों की देखभाल करना चिंता व्यक्त करना साल भर उनका ख्याल ध्यान रखना और 8 दिन जो कि 1 दिसंबर को होता है। तब यह चिन्ना धारण किया जाता है। विशेष रूप से इस लोगों के द्वारा इसके प्रति जागरूकता और समर्थन की याद दिलाने के लिए यह इस्तेमाल किया जाता है। 1988 में एड्स विषयक संस्था का आरोग्य मंत्री जागतिक परिषद में जागती 1 दिन का उदय हुआ था तब से सब सरकारें अंतरराष्ट्रीय संस्था और धर्मादाय संस्था इस दिन को मनाते हैं यह दिन 1 दिसंबर को होता है।

एड्स की उत्क्रांति टाक्स फोर्स में स्थापन की गई थी 18 सो 85 में भारत में पहला एचआईवी केस मिला था।

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्था के उद्देश्य

    • भारत में एड्स प्रसार नियंत्रण और प्रतिबंध लगाना।
    • एड्स प्रसार की गति नियंत्रण करना और एड्स द्वारा होने वाली मृत्यु का प्रमाण कम करना।
    • इसके लिए तांत्रिक और व्यवस्थापिक मदद करना।
    • जन जागृति को विशेषता निरोध का वापर करने की जागृति करना।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य 5 सालों में एड्स का प्रसार पूरा कर इसे नियंत्रित करना था।

एड्स यह बहुत खतरनाक बीमारी होती है। यह तो हम सब जानते हैं और इसे रोकने रोकना और इसे नियंत्रण करना यह बहुत जरूरी है। इसीलिए भारत सरकार द्वारा यह योजना शुरू की गई थी यह योजना तीन चार भागों में विभागीय गई है। इसका पहला भाग 1992 में शुरू हुआ था दूसरा भाग 2004 में पूरा हुआ और तीसरा भाग 2012 में पूरा हुआ।

बड़े पैमाने में राज्य जिस राज्य में एड्स का प्रमाण 60 से ऊपर है। उन्हें कम करना और राज्य में इसका प्रमाण 40 से नीचे लाना यह इसका उद्देश्य था। प्रतिबंध देखभाल सहायक और उपचार इन द्वारा देश में एड्स का प्रसार रुकवाने के लिए 5 साल का वक्त दिया गया था।

किसी भी व्यक्ति को जोर जबरदस्ती कर कर एचआईवी टेस्टिंग के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। एड्स ग्रस्त मरीजों को आरोग्य विषयक सुविधा उपलब्ध की जाएगी और उन्हें रोजगार भी उपलब्ध किया जाएगा।

एड्स की जांच राज्य अस्पतालों में और गांव के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त की जाती है। और इसकी जानकारी गुप्त रखी जाती है। इसकी जानकारी व्यक्ति के पति पत्नी मां-बाप इन इन को ही दी जाती है। इसके कारण वह मरीज की देखभाल कर सकते हैं।

एड्स का प्रसार किसी भी व्यक्ति को छूने से अथवा उसके साथ खाना खाने से या घूमने से नहीं होता यह जागृति करने के लिए भारत सरकार ने कई विज्ञापन टीवी रेडियो और अखबारों में देखकर जनजागृति की है। यह भी इस योजना का एक भाग है। लोगों को एड्स के बारे में कई अनगिनत गलतफहमियां होती है।

इन्हें दूर कर कर उन्हें एड्स के मरीजों को किस प्रकार सहायता कर कर उनकी देखभाल की जा सकती है। इसके बारे में बताया जाता है। एड्स संसर्गजन्य बीमारी है। लेकिन वह सिर्फ शरीर के शराब यानी रक्त पसीना एवं अन्य किसी पदार्थ जो शरीर से बाहर निकलता है। उससे ही होती है। यह किसी छूने की वजह से खाना खाने की वजह से या बात करने की वजह से नहीं होती यह जागृति करना बहुत आवश्यक है। क्योंकि एड्स ग्रस्त मरीजों को दूसरे तंदुरुस्त लोगों को लोगों की वजह से बहुत तकलीफ उठानी पड़ती है। वह तिरस्कार का सामना करना पड़ता है।

इसीलिए जागृति करना बहुत आवश्यक हो गया था इसीलिए भारत सरकार ने विज्ञापनों के द्वारा इसका प्रसार और जागृति करने की सूची थी इसीलिए उस दौरान इस संस्था के अंतर्गत कई विज्ञापन टीवी अकबर और न्यूज़पेपर में आए थे।

World AIDS Day - राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्था
World AIDS Day

यह बहुत आवश्यक होता है कि एड्स के मरीजों को एक दिलासा की जरूरत होती है। उन्हें गुना की आवश्यकता नहीं होती वह एक बीमार मरीज होता है। बाकी वह हमारी तरह ही एक इंसान ही होता है। उसे तिरस्कृत नजरों से देखना या उसे उस प्रकार की बर्ताव करना गलत बात है।

एड्स ग्रस्त मरीजों की जानकारियां गुप्त रखी जाती है। इसमें घबराने की आवश्यकता नहीं होती सरकारी अस्पतालों में यह जांच मुफ्त की जाती है। और यह गोपनीयता रखी जाती है। कि अब दूसरे किसी को ना बताई जाए और आप का इलाज भी गुप्त तरीके से होता है।

अगर आपके आसपास रहने वाले लोगों को ऐड से एचआईवी का कोई लक्षण दिखाई दे तो उन्हें इस योजना के बारे में जरूर बताएं यह योजना उनके लिए बहुत ही उपयुक्त साबित हो सकती हैं।

इस योजना के अंतर्गत एड्स के प्रति जागरूकता लाने का सरकार का दिया है। उसे पूरा करने की हमारी एक भारत के नागरिक होने के प्रति एक जिम्मेदारी बनती है।

एड्स रोग भारत से कम करने की जो कोशिश भारत सरकार कर रहा है। उसमें हमारा योगदान बहुत ही आवश्यक होता है।

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