अपने अंदर के टैलेंट को कैसे पहचाने – कभी सोचा है ?

अपने अंदर के टैलेंट को कैसे पहचाने सोचा है कभी इस बारे में ?

हेलो दोस्तों आज हम आपसे अपने अंदर के टैलेंट को कैसे पहचाने उसके बारे मे बात करने जा रहे है। कोई भी अपने खुद को पहचान नही पता है। ऐसी कई नही है जो अपने अंदर के टैलेंट को जल्दी पहचान पाता है। आपको आज हम उसके बारे मे बताने जा रहे है। जो आपको आपके अंदर के टैलेंट को पहचानने मैं मदत करे, आपके अंदर के टैलेंट को कैसे बाहर लाये ओर अपने टैलेंट को कैसे बड़ा करे।

      • काम की औऱ अपकी दिलचस्पी
      • काम करते समय रुचि
      • काम के बारे मे सोच
      • काम से मिलने वाला सुकून

काम की औऱ आपकी दिलचस्पी

अगर हम टैलेंट की बात करने जा रहे है। तो सबसे पहले हमें यह समझना चाहिए कि, आपको क्या काम करना पसंद है। हर किसी व्यक्ति की अलग पहचान होती है। कोई अपने आप से ही खुश होता है। और कोई दूसरे को देखकर खुश होता है।

अपने अंदर के टैलेंट को कैसे पहचाने - कभी सोचा है ?

काम का भी कुछ ऐसा ही है। कभी हम खुद के काम पर खुश होते है कभी किसी ओर के काम पर। सबसे पहले आपको यह बात समझने की जरूरत है। हमेशा कोई न कोई काम करते है तो उसके बारे मे समझना जरूरी है।

आप काम कैसे करना पसंद करते हो, आप वह काम क्यों करना चाहते हो, आपको काम किस लिए करना है ओर वह काम कब तक करना है। यह सब समझना है। अगर आप अपने अंदर के टैलेंट को देखते हो तो यह बात जरूरी है कि, आप काम की ओर आपकी दिलचस्पी दिखानी जरूरी है।

काम करते समय रूचि

जैसे कि हम सोच रहे है कि, क्या काम करे जिससे आपको आपका टैलेंट पता चले। पर अगर आप यह सोचते हो तो आपको कभी पता नही चल सकता। जो भी काम है सिर्फ आपको यही कारण है कि उसकी रुचि आपको पता चले।

अपने अंदर के टैलेंट को कैसे पहचाने - कभी सोचा है ?

जब आपको किसी काम को करने मे मज़ा आ रहा है। आप उस काम को पूरी तरह से पूरा करने की कोशिश कर रहे हो। तो आपको वह काम ज़रूर करना है। कभी कभी ज्यादा समय तक काम करते रहने से भी काम मैं रुचि बन जाती है। पर ऐसा नही है कि वह आपका टैलेंट है। आपको हमेशा किसी न किसी तरह का काम ज़रूर करते रहना है।

 किसी काम के प्रति आपको अच्छा लगता है। काम करने से आपको अच्छा लगता है तो वह काम ज्यादा समय तक करे। काम मैं रुचि होने का सही मतलब यही है। आप जो काम करते हो उसमे आप खुश हो। आपको काम करते समय किसी भी तरह का सवाल आपके मन मे नही है। और आपको जो भी काम है उसका सम्मान है।

अपने दिल से एक आवाज़ निकलनी चाहिये ओर उस आवाज़ को अपने अंदर समा कर काम करना चाहिए। ताकि आपको आपके काम के प्रति प्यार हो जाये। और आप अपने काम को किसी टैलेंट के साथ जोड़ दे।

कोई भी काम हो आपको उसमे निपुण बनकर उसे अपने अंदर समा लेना है। ऐसा आप सचिन तेंदुलकर का नाम सुनते हो। यह एक नाम है जो क्रिकेट जगत मैं सबसे बड़ा नाम माना जाता है। हर किसी मैं ऐसा टैलेंट होता है। सिर्फ उसे आपको तराशना है और उसे अपने आखरी समय तक करना है।

अपने काम के बारे मे सोच

अभी जैसे हम सचिन तेंदुलकर जी की बात कर रहे थे। वैसे ही आप अपने काम के बारे मे सोच रख सकते है। जो आपको पसंद है उसका मुकाबला कोई भी कर सकता है। पर आपको आपके काम के प्रति एक विश्वास होना जरूरी है। किसी बजी नदी को एक न एक सागर से जरूर मिलना है पर उसे पता है सागर एक जगह है। वह किसी की प्यास नही बुझा सकता। पर मैं तो चंचल हु कही पर भी जाकर किसी की भी प्यास बुझा सकती हु।

अपने अंदर के टैलेंट को कैसे पहचाने - कभी सोचा है ?

 ऐसे ही आपको आपके काम के प्रति सोचना है। कोई भी काम हो उसके बारे मे कभी बुरा सोचना नही च्याहिये। आपको शायद यह भी पता नही होंगा, सूरज खुद ही जलता है और दूसरों सृष्टि को उजागर करता है। वैसे ही आपका काम किसी न किसी को उजागर जरूर करता है। अपने मन के आवाज़ को समझकर आपको आपके काम के बारे मे सोचना है।

कभी ऐसा भी हो सकता है आप कुछ काम करते हो। उसका फल आपको कुछ दिनों बाद मिलने वाला है। तो आप अपने टैलेंट को साथ मिलाकर उसे पूरा करना है। अपने टैलेंट से वह काम आसान करना है। टैलेंट का सच मे कोई मुकाबला नही है। जो व्यक्ति कभी कुछ नही हो सकता है वह अपने काम के बारे मे सही सोचकर आपने टैलेंट के भरोसे कुछ भी कर सकता है। हर किसी मैं कुछ न कुछ टैलेंट जरूर है। बस आप उसे कैसे हासिल कर यह जरूर सोचे।

काम से मिलने वाला सुकून

जब आप मैं कुछ टैलेंट होता है। तो आप वही काम करने के बारे मे सोचते हो। पर काम करके मिलने वाला सुकून सबसे बड़ी बात है। कोई भी कुछ भी काम करे पर अगर वह काम पहिली बार कर रहा है तो उसे एक टैलेंट का ही काम समझे। अगर वही काम किसी ने पहिले भी किया हो और वही काम आप फिर से कर रहे हो। तो भी आप एक टैलेंट का काम कर रहे हो यही समझे।

अपने अंदर के टैलेंट को कैसे पहचाने - कभी सोचा है ?

जब आप उस काम को पूरा करते हो तो आपको एक सुकून मिलता है। किसी के टैलेंट को देखना भी बड़ी बात हैं। ओर अपने आप मैं उसे समा लेना उसे भी बड़ी बात है। हर कोई किसी न किसी से प्रेरित होता है। और अपने टैलेंट को पहचानने लगता है। पर टैलेंट ऐसा है जो आप खुद नही जान सकते। आप जो काम कर रहे है उसका फल आपको जरूर मिलता है। पर उसकी तारीफ अगर किसी ओर से हो तो आपके अंदर का टैलेंट कभी भी 10 गुना बढ़ जाता है।

जो भी टैलेंट है उसे अपने काम मैं ही करने की सोचे। जब आप अपने टैलेंट को अपने काम के साथ मिलाकर काम करते हो। तो आपको काम करने पर मिलने वाला सुकून सबसे बड़ा सुकुन होता है।

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