दोस्ती और प्यार का फर्क क्या है ? जानिए क्या है दोनों में फर्क

दोस्ती और प्यार का फर्क

हम आज आपसे दोस्ती और प्यार मैं क्या फर्क होता है उनके बारे मे बताने जा रहे है। सबसे पहिले यह बात कभी न बुले की दोत्ती ही प्यार का सबसे पहिले होने वाला नाता है। दोस्ती से ही प्यार के नजदीक आने का काम होता है। जो भी दोस्ती और प्यार इन दोनों को मिलाकर रखता है वह जीवन मे कभी दोखा नही खा सकता है।

दोस्ती में गुस्सा होना :

दोस्ती में गुस्सा होना
दोस्ती में गुस्सा होना

जब आप किसी से दोस्ती करते हो या कोई आपसे दोस्ती करता है तो सबसे पहले आपको दोस्ती का सही मतलब पता चलता है। कोई भी इंसान दोस्ती मैं अपने आप को अकेला नही समझता है। तो आपको सबसे पहिले अपने दोस्ती को मजबूत करना है।

जब आप अपने दोस्ती को मजबूत करते हो तब साथ मैं आपको एक अच्छा दोस्त भी मिलने लगता है। और आप अपने दोस्ती को एक नए तरके के रिश्ते मैं लेकर जाते हो। हमेशा ऐसे ही होता है पर कभी कभी दोस्ती मैं कुछ ऐसी बाते हो जाती है जो कभी अछि नही होती है।

दोस्ती मैं गुस्सा होना अच्छा नही होता है। कि भी गलती अगर किसी से भी हो जाये तो उसकी माफी तुरत मांग लेनी चाहिए। हमेशा देखा गया है कि दोस्ती मैं गुस्सा कभी अच्छा नही होता है। अपनी दोस्ती पर गर्व होना चाहिए। अपनी दोस्ती एक मिसाल होनी चाहिए। ताकि लोग आपके दोस्ती के बारे मे बोलने से पहिले आपके बारे मे जरूर सोचे।

प्यार मैं गुस्सा होना :

प्यार मैं गुस्सा होना
प्यार मैं गुस्सा होना

प्यार मैं कुछ दोत्ती से विपरीत नही है। प्यार भी एक दोस्ती जैसा ही नाता है। जो दो अच्छे दोस्त निभाना जानते है। किसी भी एक इंसान से होने वाला प्यार होता है। पर दोस्ती हम किसी से भी कर सकते है। प्यार मैं हम जो सही लगता है वह सारे काम करते है। यही बात दोस्ती मैं भी लागू होती है।

पर कभी कभी प्यार मैं गुस्सा होने लगता है। किसी एक से ऐसा कुछ हो जाता है जो दूसरे को पसंद नही आता है। अपने पार्टनर को जो पसंद है वही करना जरूरी होता है। पर दोस्ती मैं तो आप अपने दोस्त से कोई भी बात शेयर कर सकते हो। यही सबसे बड़ा फर्क माना जाता है। हमेशा प्यार मैं गुस्सा अगर नही होता है तो वह प्यार एक अलग तरह का रिश्ता बनाता है।

प्यार मैं गुस्सा अगर आता है तो सबसे पहिले आपको शांत होने है। जो भी हुवा है उसके बारे मैं सोचना है। और अपने आप कोई तो हल निकालकर प्यार कोई नए रिश्ते की तरह देखना है।

दोस्ती को निभाना :

दोस्ती को निभाना
दोस्ती को निभाना

जैसे कि हमने देखा हर कोई अपने दोस्ती और प्यार को एक साथ लाने की कोशिश करता है। पर असल मे दोस्ती है जो आपको प्यार मैं बदल देती है। और जब दोस्ती निभानी होती है तो बिना किसी नफरत के दोस्ती को निभाया जाता है। दोस्ती मैं कोई बुरी बात नही होती है, दोस्ती सबसे अच्छा रिश्ता भी कहलाता है। दोस्ती का सही मतलब ही खुद से प्यार करना होता है।

जब आप अपने दोस्ती को निभने की बात करते हो तो सबसे पहिले आपको अपने आप से दोस्ती के सही मायने समझना जरूरी है। हमेशा खुद ही दोस्ती को बढ़ाने की कोशिश किया करे। जिससे आपको अपने दोस्ती पर हमेशा नाज रहे। और आप अपने दोस्ती को एक अलग रिश्ता बनाये।

हर कोई कहता है दोस्ती निभाना सबसे बड़ा काम है। पर हम यह नही समझ पाते कि दोस्ती निभाना बडा काम नही दोस्ती मैं सिर्फ आपको सच के साथ रहना है। और अपने दोस्त के साथ खुद से ज्यादा प्यार करना है। हर कोई बात अपने दोस्त से शेयर करनी है।

प्यार को निभाना :

प्यार को निभाना
प्यार को निभाना

जैसे हमने देखा दोस्ती को निभाने ओर प्यार को निभाया एक जैसा ही है। कोई भी इंसान प्यार से बढ़कर दोस्ती करता है और कोई भी इंसान दोस्ती से बढ़कर प्यार करता है। दोस्ती और प्यार मैं कोई फर्क नही होता है यह समझ लेना जरूरी है। हर कोई जानता है प्यार और दोस्ती यह एक समान की जाने वाली बात है।

प्यार निभाने के लिए झूठ का सहारा कभी नही लेना चाहिए और साथ ही साथ मैं खुद को प्यार के काबिल करना जरूरी है। हमे सिर्फ अपने प्यार और दोस्ती के अंतर को समझकर रिस्तो से निभाना जरूरी हैं।

प्यार मैं है कर बात करने का फायदा भी होता है। अगर आप अपने प्यार को हँसने के लिए कामियाब हो जातो है। जब आप अपने प्यार मैं खुश होते हो या किसी भी तरह की कोई तकलीफ नही समझते हो। तो आप आपने प्यार को निभाने के लिए तैयार रहते हो।

 

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