दीपावली में रंगोली का क्या महत्व है ? दिवाली में रंगोली क्यों बनाई जाती है ?

0
दीवाली में रंगोली
दीवाली में रंगोली

नमस्ते दोस्तों, आज हम इस लेख के माध्यम से आपको बताएँगे कि दीपावली में रंगोली का क्या महत्व है? और दिवाली में रंगोली क्यों बनाई जाती है? और उसके ऐसे कौन से फायदे हैं? जो आपको लाभदाई है। तो चलिए जानते हैं रंगोली के बारे में भारत के प्राचीन संस्कृति में से एक लोकप्रिय प्राचीन संस्कृति है रंगोली। रंगोली का सही अर्थ है रंगोली के जरिए भावनाओं को व्यक्त करना। अलग-अलग राज्यों में रंगोली को विभिन्न नाम से जाना जाता है। रंगोली विशेष त्यौहार और पूजा के दिन बनाई जाती है। रंगोली को आमतौर पर सूखे और प्राकृतिक रंगों से बनाया जाता है। यह ज्यादातर के दैहलीज और आंगन में बनाई जाती है।

रंगोली आमतौर पर उत्साह, शुभ विवाह, शुभ मुहूर्त और पूजा पाठ, शुभ कार्य में बनाई जाती है। दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जो हिंदू बहुत जल्लोष के साथ मनाते हैं। और दियो से अपने घरों को जगमगा देते हैं। चारों और रोशनी ही रोशनी दिखाई पड़ती है। परंतु दियो के साथ-साथ रंगो का भी इसमें समावेश है।

भारत जैसे संस्कृतिक देश में रंगों का बहुत बड़ा महत्व है। यहा पर आए दिन कोई ना कोई त्यौहार रहता है। लेकिन दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जो साल में एक बार आता है। और लोग इसे बड़े उत्साह से मनाते हैं। रंगो के बिना यह दुनिया बेजान हो जाएगी। रंगों का अपने जीवन में बहुत बड़ा महत्व है। शायद ही कोई ऐसी खुशी होगी जो बिना रंगों के मनाई गई हो।

रंगोली में ज्यादातर ज्यामितिक आकार एवं फूल पत्तों एवं देवताओं की आकृतियां और कोई भी प्रकार का दृश्य बनाया जा सकता है। रंगोली बनाने के पीछे धार्मिक मान्यता यह है कि रंगोली बनाने से अशुभ शक्तियां आपके घर में प्रवेश नहीं करती है। और आपके घर में हमेशा सकारात्मक शक्ति का और दैवीय शक्ति का वास रहता है।

रंगोली का महत्व :

रंगोली का महत्व
रंगोली का महत्व

प्राचीन काल से भारत वंश में त्योहारों पर और शुभ काम के समय रंगोली बनाने की प्रथा चली आ रही है। रंगोली का हिंदू धर्म में बहुत बड़ा महत्व है। बिना रंगों के कोई भी त्यौहार बेजन लगेगा। किसी भी उत्सव या पूजा पाठ, शुभ मुहूर्त और शुभ विवाह में रंगोली को बनाई जाती है। रंगोली से संबंधित कई सारी धार्मिक मान्यताएं हैं।

हिंदू धर्म के अनुसार रंगोली सिर्फ एक कला या चित्र नहीं है या कोई भी सजावटी की वस्तु नहीं है। घर में रंगोली बनाने से यह बुरी आत्मा और वास्तु दोष को दूर रखती है।

रंगोली बनाने से घर में सुख समृद्धि आती है। फूल, दिए और प्राकृतिक रंगो के सहायता से रंगोली बनाई जाती है। रंगोली दीवारों पर भी बनाई जाती है। विविध प्रकार की आकृतियां बनाई जाती है। आज भी लोग गांव में दीवारों को रंगोली से सजाते हैं। लेकिन मेट्रो सिटीज में मानो यह सब परंपराएं खत्म सी हो गई है। सिर्फ त्योहारों पर ही लोग रंगोली बनाते हैं।

दीपावली में रंगोली बनाने के फायदे क्या है ?

दीपावली में रंगोली बनाने के फायदे
दीपावली में रंगोली बनाने के फायदे

दीपावली में रंगों की बहुत ही ज्यादा अहमियत है। दीपावली में प्राकृतिक रंगों की सहायता से रंगोली की जाती है। रंगो को देखकर मन को एक अलग प्रकार का आनंद प्राप्त होता है। रंगोली बनाने के पीछे एक महत्वपूर्ण धारणा यह है कि अगर हमारे घर के आंगन में रंगों का एकत्रित समावेश है। तो यह आकर्षण का एक केंद्र होता है। जिससे माता लक्ष्मी घर में आती है। रंगोली के रंगों से आकर्षण होता है।

रंगोली से माता लक्ष्मी का स्वागत करना चाहिए। रंगोली करने से घर शुद्ध होता है। और यह माना जाता है कि दीपावली के समय माता लक्ष्मी प्रत्येक के घर में आती है। माता लक्ष्मी के आगमन के लिए और उनके स्वागत के लिए रंगोली की जाती है। और दीए जलाए जाते हैं। ऐसी ही कई सारी धार्मिक मान्यताएं रंगोली से संबंधित है।

दीपावली में रंगोली से जुड़ी कुछ धार्मिक मान्यताएं जिसकी वजह से रंगोली बनाने की प्रथा की शुरुआत हुई :

दीपावली में रंगोली से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
दीपावली में रंगोली से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

अलग-अलग धर्म की विभिन्न मान्यताएं हैं। परंतु रंगोली बनाने के पीछे एक ही उद्देश्य है। कि यह आपको शुभ फल की प्राप्ति दे। और नकारात्मक शक्तियों को आपके घर से दूर रखें और आपके जीवन में सुख और शांति प्रदान करें। तो चलिए जानती है रंगोली से जुड़ी कुछ धार्मिक मान्यताएं।

देवी उर्वशी से जुडी प्रचलित प्राचीन कहानी :

देवी उर्वशी
देवी उर्वशी

ब्रह्मा जी ने आम के पेड़ का रस निकालकर जमीन पर एक स्त्री  का चित्र बनाएं। वह चित्र इतना सुंदर था कि वह स्वर्ग की अप्सराओं को भी मात दे रहा था। बाद में वह देवी उर्वशी के नाम से प्रचलित हुई। और उर्वशी का सौंदर्य तो पूरे विश्व में चर्चित है। तभी से रंगोली की प्रथा का आरंभ हुआ ऐसा माना जाता है।

रामायण से संबंधित धार्मिक मान्यताएं :

रामायण से संबंधित धार्मिक मान्यताएं
रामायण से संबंधित धार्मिक मान्यताएं

भगवान राम और माता सीता का विवाह बहुत ही धूमधाम से और अलौकिक हुआ था। पुराणों में जभी माता सीता के विवाह मंडप का वर्णन किया गया है। उसमें भी रंगोली का वर्णन किया है। उसी प्रकार जब भगवान राम जी, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या लौट रहे थे। तभी अयोध्यावासी ने उनका स्वागत अयोध्या नगरी को सजाकर किया था।  हर घर घर में रंगोली और दीये जलाए थे। तभी से रंगोली की प्रथा चली आ रही है ऐसी धार्मिक मान्यताएं हैं।

चित्र लक्षण ग्रंथ में की गई कथा का वर्णन :

चित्र लक्षण ग्रंथ
चित्र लक्षण ग्रंथ

चित्र लक्षण ग्रंथ के अनुसार एक राजा के पुरोहित का बेटा मर गया। तभी वह बहुत दुखी और चिंतित हो गए। राजा भी इस बात से चिंतित हो गए। और उन्होंने भगवान ब्रह्मा का आवाहन किया और उनसे अपनी चिंता व्यक्त की तभी ब्रह्मा जी ने राजा से कहा कि वह पुरोहित के पुत्र की चित्र बनाएं। तभी राजा ने जमीन पर कुछ रेखाएं खींची और उसका चित्र बनाने का प्रयास किया। ब्रह्मा जी ने चित्र में जान डाल दी। और पुरोहित का पुत्र जीवित हो गया। तभी से रंगोली की प्रथा शुरू हुई ऐसे धार्मिक मान्यताएं है।

भगवान तिरुमल से जुड़ी प्रचलित कहानी :

हमेशा लड़कियां ही क्यों रंगोली बनाती है। इसके पीछे भी एक धार्मिक मान्यता है।इसके पीछे एक प्राचीन कहानी है। कहां जाता है कि तमिलनाडु में मारकाड़ी के महीने में देवी अंडाल ले भगवान तिरुमल से विवाह करने की इच्छा व्यक्त की और उनसे विनती की, वह उनसे विवाह करें।

उसके पश्चात उन्होंने कड़ी साधना की और वह भगवान तिरुमल में विलीन हो गई। तब से अविवाहित लड़कियां सुबह जल्दी उठकर सूर्योदय से पहले भगवान तिरुमल के स्वागत हेतू रंगोली बनाती है।

इस प्रकार हिंदू धर्म में और पुराणों में प्राचीन कहानी के अनुसार रंगोली के कई सारे महत्व है। और पौराणिक कहानियां है। जहां से रंगोली बनाने की प्रथा की शुरुआत हुई थी। रंगोली बनाने से आपके घर में सुख शांति और समृद्धि हमेशा बनी रहती है। और देवी-देवताओं का आशीर्वाद बना रहता है। इसके लिए रंगोली बनाना आवश्यक है।

जानिए –

दिवाली के दिन झाड़ू को क्यों पूजते है ? लक्ष्मी माता को प्रसन्न करे

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here